खाकी…… कवी- श्याम पेडणेकर,ठाणे
खाकी
कवी- श्याम पेडणेकर,ठाणे
विदर्भ 24न्यूज/ठाणे:-
खाकी
शहिद झाले कित्येक म्हणून
कणा खाकीचा मोडणार नाही ।
बोट कापले म्हणून
तलवार धरणं सोडणार नाही ॥
जंगल सारे अपुरे पडेल
जेव्हा पेटून उठेल खाकी ।
कसला नक्षल अन् कसला वाद
उरणार नाही बाकी ॥
-कवी- श्याम पेडणेकर,ठाणे

| M | T | W | T | F | S | S |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 1 | 2 | |||||
| 3 | 4 | 5 | 6 | 7 | 8 | 9 |
| 10 | 11 | 12 | 13 | 14 | 15 | 16 |
| 17 | 18 | 19 | 20 | 21 | 22 | 23 |
| 24 | 25 | 26 | 27 | 28 | 29 | 30 |
| 31 | ||||||