खाकी…… कवी- श्याम पेडणेकर,ठाणे
खाकी
कवी- श्याम पेडणेकर,ठाणे
विदर्भ 24न्यूज/ठाणे:-
खाकी
शहिद झाले कित्येक म्हणून
कणा खाकीचा मोडणार नाही ।
बोट कापले म्हणून
तलवार धरणं सोडणार नाही ॥
जंगल सारे अपुरे पडेल
जेव्हा पेटून उठेल खाकी ।
कसला नक्षल अन् कसला वाद
उरणार नाही बाकी ॥
-कवी- श्याम पेडणेकर,ठाणे

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